Mahadevi Verma Ka Jivan Parichay: महादेवी वर्मा का जीवन परिचय, कृतियाँ और उपलब्धियाँ

Mahadevi Verma Ka Jivan Parichay: महादेवी वर्मा का नाम हिन्दी साहित्य के महान कवि-कवयित्री में आगे आता है। महादेवी वर्मा हिंदी साहित्य की एक प्रसिद्ध कवयित्री, निबंधकार और लघु कथाकार थीं। वे छायावाद युग की प्रमुख स्तंभों में से एक मानी जाती हैं। साहित्य में उनके योगदान के कारण उन्हें “आधुनिक मीरा” की उपाधि से भी सम्मानित किया गया। आज के इस लेख में हम Mahadevi Verma ka jivan parichay जानेंगे जो आपके परीक्षाओं के लिए अति महत्वपूर्ण है, तो आप इस लेख को पूरा जरूर पढ़ें।

महादेवी वर्मा का संक्षिप्त परिचय: Mahadevi Verma Ka Sankshipt Jivan Parichay

नाममहादेवी वर्मा
जन्मसन् 1907 ई.
जन्म स्थानफर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश
पिता का नामश्री गोविन्द प्रसाद वर्मा
माता का नामश्रीमती हेमरानी देवी
उपलब्धियाँमहिला विद्यापीठ की प्राचार्य, पद्मभूषण पुरस्कार, सेकसरिया पुरस्कार, मंगलाप्रसाद पुरस्कार, भारत-भारती पुरस्कार, भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार
प्रमुख कृतियाँनीरजा, निहार, रश्मि, दीपशिखा, सांध्यगीत
भाषाखड़ी बोली, ब्रज भाषा
शैलीमुक्तक, चित्र, प्रगति
मृत्यु11 सितम्बर, 1989 ई.

Mahadevi Verma ka jivan parichay: महादेवी वर्मा का जीवन परिचय

महादेवी वर्मा का जन्म (Mahadevi verma ka janm) 26 मार्च 1907 को उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद शहर में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री गोविन्द प्रसाद वर्मा था। और उनकी माता जी का नाम श्रीमत हेमरानी देवी था। 9 वर्ष की उम्र में महादेवी वर्मा जी का विवाह हो गया। इनके पति का नाम श्री स्वरूप नारायण वर्मा था। महादेवी वर्मा जी का प्रारंभिक शिक्षा इंदौर में मिशन स्कूल से हुई। और 9 वर्ष की उम्र में विवाह हो जाने के कारण इनकी शिक्षा कुछ दिनों के लिए रुक गई। इसके बाद इन्होंने M.A की शिक्षा प्रयाग विश्वविद्यालय से पूरी की।

महादेवी वर्मा जी ने घर पर ही चित्रकला तथा संगीत की शिक्षा भी प्राप्त की कुछ समय तक वे ‘चाँद’ पत्रिका की सम्पादिका भी रही। 11 सितम्बर 1987 ई. को इस महान लेखिका का स्वर्गवास हो गया।

Mahadevi Verma ka Sahityik parichay: महादेवी वर्मा साहित्यिक परिचय

महादेवी वर्मा (Mahadevi Verma ka Jivan Parichay in Hindi) जी छायावादी कवियों की वृहद चतुष्टयी में आती है। इनके काव्य में वेदना की प्रधानता है। काव्य के अतिरिक्त इनकी बहुत सी श्रेष्ठ गद्य रचनाएं भी है। महादेवी वर्मा जी ने प्रयाग में ‘साहित्यकार संसद’ की स्थापना करके साहित्यकारों का मार्गदर्शन भी किया। और नारी को अपनी स्वतंत्रता और अधिकारों के प्रति सजग किया है। कुछ वर्षों तक महादेवी वर्मा उत्तर प्रदेश विधान परिषद की मनोनीत सदस्य भी रही है।

भारत के राष्ट्रपति से इन्होंने ‘पद्मभूषण’ की उपाधि प्राप्त की। हिन्दी साहित्य सम्मेलन की ओर से इन्हें ‘सेकसरिया पुरस्कार’ तथा ‘मंगलाप्रसाद पारितोषिक’ मिला 1983 ई. में ‘भारत – भारती’ तथा यामा पर ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ से इन्हें सम्मानित किया गया।

महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएं

महादेवी वर्मा की रचनाएँ भावनात्मक गहराई और काव्यात्मक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध हैं।

  • निहार
  • रश्मि
  • नीरजा
  • यामा
  • दीपशिखा
  • साध्यगीत
  • सन्धिनी
  • आधुनिक कवि
  • अतीत के चलचित्र
  • स्मृति के रेखाएं
  • श्रृंखला की कड़िया

FAQs

Q.1 महादेवी वर्मा का जन्म कब और कहा हुआ था?

Ans. महादेवी वर्मा (Mahadevi Verma ka jivan parichay) का जन्म 26 मार्च 1907 को उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद शहर में हुआ था।

Q.2 महादेवी वर्मा के माता पिता का नाम क्या था?

Ans. महादेवी वर्मा के माता का नाम श्रीमत हेमरानी देवी और पिता का नाम श्री गोविन्द प्रसाद वर्मा था।

Q.3 महादेवी वर्मा के पति का नाम क्या था?

Ans. महादेवी वर्मा के पति का नाम श्री स्वरूप नारायण वर्मा था।

Q.4 महादेवी वर्मा का मृत्यु कब हुआ था?

Ans. महादेवी वर्मा का मृत्यु 11 सितम्बर 1987 ई. को हुआ था।

Q.5 महादेवी वर्मा को किस रचना के लिए उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला?

Ans. महादेवी वर्मा को उनके काव्य-संग्रह ‘यामा’ (1983) के लिए प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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